Monday, May 13, 2013

देश के सम्मान को बचाने के लिए एक बहुत छोटी कीमत होगी.


हमारे समय की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि लोगों को 'चोर' के रूप में सभी राजनेताओं को देखती है| लेकिन एक ही समय में वे भी देश पर राज करने के लिए बार-बार पंचायत से लेकर संसद तक उन्हें चुनाव करने के लिए मजबूर कर रहे हैं| और, इन 'चोर' जीवन और वे देश को लूटने के लिए की जरूरत है एक गठजोड़ का निर्माण करने के लिए हर पेशे के सभी क्षेत्रों से उन्हें इसी तरह के लोग मिलते है| आपके पास विकल्प है?


अगस्त 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में लोकपाल आंदोलन के बाद, भारत परिवर्तन के कगार पर था| लेकिन आयोजित चुनाव के बाद सारी उम्मीदें धराशायी हो गयी| अन्ना के लिए समर्थन घट गया और राजनीतिक दल कामयाब रहे|

जनसंख्या का 60% जो गरीब है उसने भ्रष्टाचार को जीवन का एक भाग के रूप में स्वीकार कर लिया है| जो 30% मध्यम वर्ग, कुछ बदलाव ला सकता है, वो चुनाव को नजरअंदाज करता है| मध्यम वर्ग का सबसे ज्यादा प्रतिशद भ्रष्ट ही है| अन्ना के समर्थन में गिरावट और देश भ्रष्ट द्वारा शासित होना| शायद हम इसीके लायक है?

भारत में रोजगार गारंटी और खाद्य सुरक्षा योजनाओं, आजादी के 65 साल बादभी, लोगों को यह बुनियादी जरूरत नहीं है| भ्रष्टाचार देश में हर समस्या के लिए जिम्मेदार है| एक घोटाला अकेले एक विभाग तक सीमित नहीं है| यह हर एक के जीवन को प्रभावित करता है|

हम चुनाव में भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दा बना के, चुनाव के समीकरण बदल सकते हैं| शासक वर्ग अपनी सुविधा के अनुसार कानून बनाता है| जो भी उम्मीदवार कम से कम खर्च पर अपने चुनाव अभियान लड़ता है, उसी के लिए वोट चाहिए| हम ईमानदार उम्मीदवारों और ना की दलों के लिए वोट करे, यह आवश्यक है| कुछ व्यक्तियों के लिए यह मतदान नीति बहस का मुद्दा होगी, जबकि कुछ के लिए यह विसंगत लग सकता है| एक व्यक्ति के तरफ ज़ुकाव ही सही पर हमारी मातृभूमि की लूट होने से कुछ समय के लिए यह पक्षपात ही सही| यह देश के सम्मान को बचाने के लिए एक बहुत छोटी कीमत होगी|

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